वेलेन्टाइन डे 14 फ़रवरी करे प्यार का इजहार

वेलेन्टाइन डे 14 फ़रवरी को अनेकों लोगों द्वारा दुनिया भर में मनाया जाता है। अंग्रेजी बोलने वाले देशों में, ये एक पारंपरिक दिवस है, जिसमें प्रेमी एक दूसरे के प्रति अपने प्रेम का इजहार वैलेंटाइन कार्डभेजकर, फूल देकर, या मिठाई आदि देकर करते हैं। ये छुट्टी शुरुआत के कई क्रिश्चियन शहीदों में से दो, जिनके नाम वैलेंटाइन थे, के नाम पर रखी गयी हैउच्च मध्य युग में, जब सभ्य प्रेम की परंपरा पनप रही थी, जेफ्री चौसर के आस पास इस दिवस का सम्बन्ध रूमानी प्रेम के साथ हो गया !

ये दिन प्रेम पत्रों के “वैलेंटाइन” के रूप में पारस्परिक आदान प्रदान के साथ गहरे से जुड़ा हुआ है। आधुनिक वैलेंटाइन के प्रतीकों में शामिल हैं दिल के आकार का प्रारूप, कबूतर और पंख वाले क्यूपिड का चित्र.19वीं सदी के बाद से, हस्तलिखित नोट्स की जगह बड़े पैमाने पर बनाने वाले ग्रीटिंग कार्ड्स ने ले ली है।[1] ग्रेट ब्रिटेन में उन्नीसवीं शताब्दी में वैलेंटाइन का भेजा जाना एक फैशन था और, 1847 में, एस्थर हौलैंड ने अपने वोर्सेस्टर, मैस्साचुसेट्स स्थित घर में ब्रिटिश मॉडलों पर आधारित घर में ही बने कार्ड्स द्वारा एक सफल व्यवसाय विकसित कर लिया था। 19 वीं सदी के अमेरिका में वैलेंटाइन कार्ड की लोकप्रियता जहां कई वैलेंटाइन कार्ड अब सामान्य ग्रीटिंग कार्ड प्यार की घोषणाओं के बजाय, संयुक्त राज्य अमेरिका में छुट्टियों के भविष्य व्यावसायीकरण के एक अग्रदूत था रहे हैं

वेलेन्टाइन डे जब हवा ने फूल को पहली बार चूमा तो खुशबू ने जन्म लिया और जब रोते हुए बच्चे को माँ ने सहलाया तो पहली बार प्यार आसमान से जमीन पर उतरा। बारूदों के मौसम में जी रही इस दुनिया में भले ही सब कुछ समाप्त हो जाए, मगर मोहब्बत फिर भी जिंदा रहेगी। चाँदनी में भीगकर क्या किसी का मन कभी पूरी तरह से भरा है?

क्या हवा की गुनगुनाहट किसी को हर दम के लिए तृप्त कर सकती है? क्या सूरज की रोशनी से कोई पूरी जिंदगी के लिए कुछ ही दिनों में शक्ति पा सकता है और क्या किसी हँसते हुए बच्चे को देखकर मन अंतिम रूप से भर सकता है?…नहीं ना। ठीक वैसे ही है वेलेंटाइन-डे, प्यार को जिंदा रखने का प्रण लेने का दिन है।

 

 

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