पिता से हठ कर जुडी पेत्रक कारोबार से और दिलाई नई पहचान |

जिस नल्ली की सिल्क की साड़ी आप खास मोको पर पहनते हे|उस कंपनी की वाईस चेयरमेन हे लावण्या नल्ली|

१९वि शताब्दी का वो आखरी साल था| नल्ली चित्रासामी चेट्टी अपने परिवार के पालन पोषण के लिए साड़ी बेचने का काम करती थे| वे कांचीपुरम में रहते थे और रोजाना साइकिल पर साड़ी लेकर चेन्नई जाकर बेचते| १९२८ मे उन्होंने चेन्नई के टी नगर में एक छोटी सी साड़ी की दुकान खोली जो आज नल्ली सिल्क्स के नाम से एक ब्रांड बन गया हे| देश भर में ३२ के करीब स्टोर है| इनमे से दो स्टोर अमेरिका और सिंगापुर में भी है|

लावण्या नल्ली चोथी पीड़ी की सदस्य है और और अपने इस पेत्रक कारोबार से जुड़ने वाली पहली महिला भी है| ६५० करोड़ रुपये सालाना कारोबार करने वाले नल्ली सिल्क्स की इस सदस्य ने नई स्टोर खोलने और कंपनी का राजस्व बढाने में

शनिवार को अगर जूते चप्पल चोरी हो जाये तो समझिये बला टली|

महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हे| लेकिन जब लावण्या ने पहली बार बिजनेस से जुड़ने की इच्छा जताई थी तब उनके पिता को उन्हें लेकर थोड़ी शंका थी| पर लावण्य ने थान लिया था और वे अपने इस फेसले को लेकर अडिग रही| उन्होंने पिता से कारोबार की बारीकिया सिखाने को कहा| बेटी की जिद के आगे पिता हर गए और उन्होंने बेटी को बिजनेस में शामिल कर लिया| २००७ में लावण्या ने आधुनिक महिलाओ के लिए नल्ली नेक्स्ट नाम से नया ब्रांड लांच किया, जो एक मास्टर स्ट्रोक रहा| इसका आईडिया उन्हें स्टोर एमे खरीदारी करने आय एक युवा खरीदार से आया| दरअसल उस युवा की धारणा यह थी की नल्ली साड़ी की साड़ीया या सिल्क की साड़ियो की खरीदारी के लिए तो सही जगह है लेकिन यहाँ युवाओ के लिए कुछ खास नहीं है| लावण्या ने भी देखा की अक्सर खरीदार सिल्क की साड़ी के सेक्शन में जाते और वही से खरीदारी कर वापस लौट जाते| उनकी डिज़ाइनर साड़ियो पर किसी का ध्यान ही नहीं जाता| ऐसा क्यों हो रहा था ? इसे समझने के लावण्या ने कस्टमरर्स के नेचर को समझाना शुरू किया| इसके बाद ही लावण्या ने नल्ली नेक्स्ट की शुरुआत की|  पहले यह स्टोर चेन्नई में खोला गया| रेस्पोंसे अच्छा आया तब बेंगलुरु और मुंबई में भी दो स्टोर खले गए| फ़िलहाल वे बेंगलुरु में अपने पति और बेटे के स्थ रहती है| उनका लक्ष्य आने वाले वर्षो में मल्ली स्टोर्स की संख्या को दोगुना करना है वह भी कंपनी के मूल्यों से समझोता किये बगेर|

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