नोटबंदी के समय से दोगुना कैश लोगों के हाथ पहुंचा, RBI ने दी जानकारी

जनता के हाथों में एक बार फिर भारी मात्रा में करंसी पहुंच गई है। रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद देश की जनता के पास 7.8 लाख करोड़ की करंसी रह गई थी, जो अब बढ़कर 18.5 लाख करोड़ रुपए हो चुकी है। यह नोटबंदी के बाद की करंसी की तुलना में दोगुनी से ज्यादा है, जबकि नोटबंदी के पूर्व जनता के हाथ में कुल 17 लाख करोड़ रुपए थे।

दोगुनी मुद्रा चलन में आई

रिजर्व बैंक की नवीनतम “मनी सप्लाय” रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी के बाद देश में 8.9 लाख करोड़ रुपए की मुद्रा चलन में थी, लेकिन यह भी अब दोगुनी से ज्यादा होकर 19.3 लाख करोड़ रु. तक पहुंच चुकी है। जनता के हाथ में मौजूद करंसी की गणना बैंकों में मौजूद नकदी को कम करने के बाद की गई है।

86 फीसदी करंसी अवैध घोषित की थी

रिपोर्ट के अनुसार जनता के हाथ में करंसी व चलन में मौजूद करंसी, दोनों केंद्र सरकार द्वारा 8 नवंबर को 2016 को अवैध घोषित किए गए 500 व 1000 रुपए के नोटों की तुलना में काफी ज्यादा है। उस वक्त इन नोटों संख्या 86 फीसदी थी, जिन्हें अवैध घोषित किया गया था।

नोटबंदी के ताजा आंकड़े

नोटबंदी को लेकर रिजर्व बैंक द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार 30 जून 2017 तक लोगों ने 15.28 लाख करोड़ के अवैध घोषित नोट बैंकों को लौटा दिए थे। जबकि उस वक्त 15.44 लाख करोड़ के ये नोट मौजूद थे। यानी करीब 98.96 फीसदी अवैध नोट बैंकिंग सिस्टम में लौट आए। हालांकि बैंकों में लौटे अवैध नोटों का अंतिम आंकड़ा अभी भी रिजर्व बैंक ने जाहिर नहीं किया है।

पिछले साल से 31 फीसदी ज्यादा करंसी हाथ में

-25 मई 2018 को जनता के हाथ में 18.5 लाख करोड़ की करंसी थी।

-यह 2017 की इसी अवधि की तुलना में 31 फीसदी ज्यादा है।

-नोटबंदी के बाद 9 दिसंबर 2016 को यह 7.8 लाख करोड़ के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई थी।

-नोटबंदी से पहले जनता के हाथ 17 लाख करोड़ से ज्यादा की करंसी थी।

चलन में 30 फीसदी ज्यादा

-1 जून 2018 तक देश में कुल चलन में मुद्रा 19.3 लाख करोड़ रुपए हो गई है।

-यह पिछले साल की तुलना में 30 फीसदी ज्यादा है।

-नोटबंदी के बाद 6 जनवरी 2017 को यह 8.9 लाख करोड़ रु. थी। यह नोटबंदी के बाद सबसे कम थी।

-नोटबंदी से पूर्व 5 नवंबर 2016 को देश में 17.9 लाख करोड़ की मुद्रा चलन में थी।

-वर्तमान में चलन में मुद्रा नोटबंदी के पूर्व के स्तर को भी पार कर चुकी है।

नोटों की किल्लत के दावे झूठे

रिजर्व बैंक के इन आंकड़ों से पता चलता है कि कुछ माह पहले देश में नोटों की किल्लत को लेकर किए गए दावे झूठे थे। तब लोगों द्वारा भारी मात्रा में नोटों को छिपाकर रखने और कृत्रिम नकदी संकट पैदा करने की आशंका जताई गई थी।

 

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