दशहरा एक बुराई पर अच्छाई की जीत

दशहरे का पर्व एक हिन्दू धर्म में बहुत ही महत्व रखता हें सनातन धर्म में मुख्या त्योहारों में दशहरे का पर्व बहुत महत्व पूर्ण होता हें यह त्यौहार जब नवरात्रि पूर्ण हो जाती हें तो उसके दसवे दिन इस पर्व को मनाया जाता हें इस दिन सभी एक दुसरे से गले मिलते हें और मिठाई बांटते हें | और एक दुसरे के प्रति प्रेम भाव प्रकट करते हें एसा माना जाता हें की जब प्रभु श्री राम १४ साल का वनवास पूरा कर रहे थे तो इस बिच उन्होंने रावन का वध किया था | रावन एक बहुत ही शक्तिशाली और वैभव शाली और बहुत ही पराक्रमी था | इतना शक्ति शाली था की उसने नो ग्रहों को अपने महल के खम्बो से बांध दिया था और उस समय शायद उस से बड़ा और अधिक शक्तिशाली व्यक्ति और कोई दूसरा नहीं था | साथ ही चारो वेदों का जानने वाला एसा शख्स था | राम और रावन दोनों ही एक मात्र उस समय के सबसे अधिक और बलशाली व्यक्ति थे | लेकिन रावन इतना संस्कारी होते हुवे और इतना जानने वाला होते हुवे भी उसने माता सीता का अपहरण एक साधू का वेश बनाकर किया था | जब वन में प्रभु श्री राम माता सीता की रक्षा के लिए लक्ष्मण को साथ में रखकर कर भ्रमण पर गए तभी रावन ने एक चाल चली और उसने अपनी शक्ति से एक बहुत ही सुंदर हिरन बनाया और जब माता सीता ने उस हिरन को देखा तो लक्ष्मण को उस हिरन को लाने के लिए कहा लेकिन लक्ष्मण को शायद कुछ आभास हो रहा था तो उन्होंने माता सीता से कहा की नहीं में नहीं जाऊंगा मुझे भैया का आदेश हें की में आपको छोड़कर नहीं जाऊ | लेकिन माता सीता अपने आप पर अड़ी रही और आखिरकार लक्ष्मण को विवश होना पड़ा लेकिन फिर भी लक्ष्मण ने माता सीता के चारो और एक लाइन बनाई जिस को लक्ष्मण रेखा के नाम से भी जानते हें और माता सीता को कहा की जब तक में नहीं आऊ तब तक चाहे कुछ भी हो जाये आप इस रेखा से बाहर नहीं निकलेंगे | और इस प्रकार से बोलकर लक्ष्मण वहा से चले जाते हें | जेसे ही लक्ष्मण वहा से जाते हें तभी रावन साधू का वेश बदलकर वहा आया और उसने माता सीता से बिक्षा लाने के लिए कहा तो सीता जी बिक्षा लेकर आई तो वह उस लाइन के अन्दर से ही भिक्षा देने लग गई तब उस साधू के वेश में रावन ने भिक्षा लेने से मना कर दिया और उनको उस रेखा से आगे आने के लिए विवश कर दिया जेसे सीता जी ने वह रेखा पार करी तभी अचानक से वह अपने रावन के स्वरुप में आ गया और अपने सिहासन में बिठा कर के माता सीता को अपने लंका में ले गया तभी से एक युद्ध शुरू हो गया और अंत में प्रभु श्री राम ने रावन का संहार कर दिया और वह मृत्युलोक को प्राप्त हुवा | इस प्रकार से दशहरे का पर्व भी मनाया जाता हें और इसी भावना रहती हें की सत्य पर असत्य की जीत और बुराई पर अच्छाई की जीत | और तभी से आज तक दशहरे का पर्व एक सत्य और अच्छे मन,और तन तथा शरीर से और पूर्ण रूप से अपने अन्दर की बुराइयो को ख़तम कर अपने अन्दर अच्छाई को ग्रहण करने और सत्य के रास्ते पर चलने के लिए एक प्रेरणा और प्रतिज्ञा के रूप में मनाया जाता हें |

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