डोल ग्यारस का बड़ा ही महत्व हें

 हिन्दू पर्व में डोल ग्यारस का बड़ा ही महत्व हें डोल ग्यारस को जलझुलनी एकादशी और इसे वामन ग्यारस भी कहा जाता हें |

क्योकि इस दिन भगवन विष्णु ने राजा बली से वामन अवतार धारण करके उनका सर्वस्व दान में मांग लिया था | और उनकी भक्ति से प्रभावित होकर उनको अपनी एक प्रतिमा दान कर दि थी इसलिए इसको वामन ग्यारस के रूप में भी पूजा जाता हें | जब श्री कृष्णा का जन्म मथुरा के राजा कंस के कारावास में हुवा था तो रात्रि में वासुदेव भगवन कृष्णा को कंस की नज़र से बचाने के लिए उनको यमुना पार कर के एक पालने में लेटा कर के गोकुल में माता यशोदा के पास रख दिया था | मा यशोदा के पास ही उनका पालन पोषन हुवा था | जब भगवन 11 दिन के हो गए थे तो माँ यशोदा ने उनका जलवा पूजा किया था इसके बाद ही संस्कार होते हें और उनको नए वस्त्र पहनाकर भगवन सूर्य के दर्शन करवाके उनका नामकरण किया गया था और इस दिन गोकुल में उनके आने के करण उनको एक पालकी में बेठा कर के पुरे गोकुल में धूम धाम से जुलुस निकाला गया और तब से यह प्रथा आज तक चली आ रही हें | पुरे भारत में इसको अलग अलग तरह से मनाया जाता हें | कही कही मेले का आयोजन भी होता हें झांकिय जुलुस और डोल नगाड़ो के साथ भगवान् की मूर्ति को सजाया जाता हें और बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता हें | इस दिन व्रत का भी एक अलग ही महत्व हें |

और इस तरह से यह पुरे भारत में अपने अपने विधि विधान से मनाया जाता हें |

 

 

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